NAACHGAANA
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SRK to play a Scientist and a Robot in Ra.1.

Contrary to popular belief, Arjun Rampal and not SRK will be the RA.One in King Khan’s forthcoming extravaganza. Fans should be delighted.

If Shah Rukh Khan fans are under the impression that the King Khan plays the title role in his most awaited multi-crore extravaganza, here is a bit of a surprise.

Contrary to the popular belief, Arjun Rampal and not Shah Rukh essays the character named RA.One in the film of the same name, to be directed by Anubhav Sinha.

A reliable source reveals, “Shah Rukh Khan will be seen in a double role in the film. One of his characters is that of a scientist who creates two robots-the good robot is G.One.

And the bad one is RA.One, While Shah Rukh plays the good robot, G.One, it’s Arjun Rampal who is playing the bad robot, RA.One.”

When contacted, director Anubhav Sinha promptly says, “Let others decide who is Ra.One and G.One. There are no robots in the film.” But he later did confirm, “Shah Rukh does play G.One.”

Link: http://www.mumbaimirror.com/article/30/2010123120101231025917491198a1e41/Arjun-RAmpal-will-essay-the-title-role.html

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  1. Bounty Hunter

    Guys this is my first post on NG…
    Looking forward to some POSTING Tips from you…
    Like posting an image or video…

  2. Ihab

    Is it me or does this whole “scientist creating an identical looking robot” plot seem slightly “similar” to Endhiran’s?

  3. Manish

    Aamir Khan th eActor of Decade

    (From Dainik Bhaskar)

    नई सदी के पहले दशक का अंतिम दिन है और विगत पर सरसरी निगाह डालने पर पहला प्रभाव यह नजर आता है कि यह दशक आमिर खान का रहा। बतौर निर्माता उन्होंने ‘लगान’, ‘तारे जमीं पर’ और ‘पीपली लाइव’ का निर्माण किया और उनकी ‘जाने तू या जाने ना’ भी सफल मनोरंजक फिल्म थी। गोयाकि दस वर्ष में पांच फिल्मों का निर्माण किया और पांचवी फिल्म ‘धोबी घाट’ 21 जनवरी को प्रदर्शित हो रही है।

    जिस उद्योग मंे सफलता का प्रतिशत मात्र दस रहता है, उस उद्योग में दस वर्षो में सौ प्रतिशत सफलता अर्जित करने वाले आमिर खान को सलाम। बतौर अभिनेता उन्होंने बाहरी निर्माताओं के लिए ‘मंगल पांडे’, ‘रंग दे बसंती’, ‘गजनी’ और ‘थ्री इडियट्स’ कीं, जिसमें तीन सफल रहीं। आमिर खान की तमाम कोशिशों में हम विविधता के साथ सामाजिक सोद्देश्यता देखते हैं।

    इस दशक में कम बजट की प्रभावशाली फिल्में भी बनी हैं, जिनमें ‘ए वेडनसडे’ को महान फिल्म मानना होगा। इसमंे अवाम का आक्रोश नए ढंग से अभिव्यक्त हुआ था। हास्य के नाम पर फूहड़ता परोसने वाले उद्योग में ‘भेजा फ्राय’ ताजगी लिए आई थी। इसी सिलसिले को जारी रखते हुए नए युवा निर्देशक अमिताभ शर्मा ने ‘तेरे बिन लादेन’, सुभाष कपूर ने ‘तेरा क्या होगा ओबामा’ और हबीब फैजल ने ‘दो दुनी चार’ बनाई। यह सुखद आश्चर्य है कि सुभाष कपूर ने आर्थिक मंदी के प्रभाव पर हास्य फिल्म की रचना की और हबीब फैजल ने मध्यम वर्ग की सीमित आय से प्रेरणा ली।

    रोजमर्रा के जीवन से ही अत्यंत मनोरंजक फिल्मों के लिए प्रेरणा ली जा सकती है। दरअसल रोजमर्रा के जीवन का मनोरंजन से जुड़ना बहुत ही महत्वपूर्ण है। स्लाइस ऑफ लाइफ सिनेमा रोचक हो सकता है। फंतासी ही मनोरंजन का एकमात्र साधन है-इस दकियानूसी विचार से मुक्त होना आवश्यक है। बहरहाल इस दशक में अभिषेक बच्चन, करीना कपूर, ऋतिक रोशन और रणबीर कपूर ने प्रवेश किया। इनमंे सबसे अधिक भाग्यवान अभिषेक सिद्ध हुए, जिन्होंने न्यूनतम प्रतिभा के साथ ढेरों असफल फिल्में देते हुए भी स्वयं को इस तरह जमाया है कि अगले अनेक वर्षो तक उनके पास डेट्स नहीं हैं। इस दशक में अनेक प्रतिभाशाली युवा निर्देशक सामने आए हैं परंतु राजकुमार हीरानी ने तीन निरंतर सुपर सफल फिल्में देकर स्वयं को चक्रवर्ती राजा सिद्ध किया है।

    उनकी फिल्मों ने सफलता के साथ सामाजिक सोद्देश्यता बरकरार रखी है। राजकुमार हीरानी लेखक-फिल्मकार हैं और उनका लेखक स्वरूप ही निर्देशकीय शक्ति का आधार है। इस दशक में फिल्म में पूंजी निवेश और फिल्म प्रदर्शन और वितरण क्षेत्रों में कॉपरेरेट और मल्टीप्लैक्स के कारण क्रांतिकारी परिवर्तन हुए हैं। फिल्म के प्रचार के लिए सितारे सबकुछ करने को तैयार हैं। दरअसल मनोरंजन उद्योग में टेलीविजन अत्यंत लोकप्रिय सिद्ध हो रहा है और भविष्य में इसकी पहुंच इतनी अधिक व्यापक होगी कि कुछ फिल्मों का निर्माण केवल टेलीविजन पर प्रदर्शन के लिए होगा। यह राष्ट्रीय चिंता की बात होनी चाहिए कि इस माध्यम का सारा संचालन लोकप्रियता आकलन के अत्यंत सीमित और दोषपूर्ण तरीकों पर टिका है। दूरदर्शन को मजबूत बनाकर ही इन प्राइवेट चैनलों के संचालकों को सही सबक सिखाया जा सकता है।

    आजकल हमेशा बेचैन रहने वाला युवा वर्ग प्राय: च्यूइंगम का प्रयोग करता है। टेलीविजन आंखों का च्यूइंगम है। टेलीविजन की खबरों ने कहर भी ढाया और जेसिका लाल जैसे हत्याकांड को भी पुन: जीवित किया है। इसी ‘च्यूइंगम’ ने जागते रहो की हुंकार भी लगाई है। नई सदी के पहले दशक ने आगामी तीव्र परिवर्तन का प्रोमो भी प्रस्तुत किया है।

  4. Manish

    Aamir Khan.. The Actor of the Decade

    परदे के पीछे. नई सदी के पहले दशक का अंतिम दिन है और विगत पर सरसरी निगाह डालने पर पहला प्रभाव यह नजर आता है कि यह दशक आमिर खान का रहा। बतौर निर्माता उन्होंने ‘लगान’, ‘तारे जमीं पर’ और ‘पीपली लाइव’ का निर्माण किया और उनकी ‘जाने तू या जाने ना’ भी सफल मनोरंजक फिल्म थी। गोयाकि दस वर्ष में पांच फिल्मों का निर्माण किया और पांचवी फिल्म ‘धोबी घाट’ 21 जनवरी को प्रदर्शित हो रही है।

    जिस उद्योग मंे सफलता का प्रतिशत मात्र दस रहता है, उस उद्योग में दस वर्षो में सौ प्रतिशत सफलता अर्जित करने वाले आमिर खान को सलाम। बतौर अभिनेता उन्होंने बाहरी निर्माताओं के लिए ‘मंगल पांडे’, ‘रंग दे बसंती’, ‘गजनी’ और ‘थ्री इडियट्स’ कीं, जिसमें तीन सफल रहीं। आमिर खान की तमाम कोशिशों में हम विविधता के साथ सामाजिक सोद्देश्यता देखते हैं।

    इस दशक में कम बजट की प्रभावशाली फिल्में भी बनी हैं, जिनमें ‘ए वेडनसडे’ को महान फिल्म मानना होगा। इसमंे अवाम का आक्रोश नए ढंग से अभिव्यक्त हुआ था। हास्य के नाम पर फूहड़ता परोसने वाले उद्योग में ‘भेजा फ्राय’ ताजगी लिए आई थी। इसी सिलसिले को जारी रखते हुए नए युवा निर्देशक अमिताभ शर्मा ने ‘तेरे बिन लादेन’, सुभाष कपूर ने ‘तेरा क्या होगा ओबामा’ और हबीब फैजल ने ‘दो दुनी चार’ बनाई। यह सुखद आश्चर्य है कि सुभाष कपूर ने आर्थिक मंदी के प्रभाव पर हास्य फिल्म की रचना की और हबीब फैजल ने मध्यम वर्ग की सीमित आय से प्रेरणा ली।

    रोजमर्रा के जीवन से ही अत्यंत मनोरंजक फिल्मों के लिए प्रेरणा ली जा सकती है। दरअसल रोजमर्रा के जीवन का मनोरंजन से जुड़ना बहुत ही महत्वपूर्ण है। स्लाइस ऑफ लाइफ सिनेमा रोचक हो सकता है। फंतासी ही मनोरंजन का एकमात्र साधन है-इस दकियानूसी विचार से मुक्त होना आवश्यक है। बहरहाल इस दशक में अभिषेक बच्चन, करीना कपूर, ऋतिक रोशन और रणबीर कपूर ने प्रवेश किया। इनमंे सबसे अधिक भाग्यवान अभिषेक सिद्ध हुए, जिन्होंने न्यूनतम प्रतिभा के साथ ढेरों असफल फिल्में देते हुए भी स्वयं को इस तरह जमाया है कि अगले अनेक वर्षो तक उनके पास डेट्स नहीं हैं। इस दशक में अनेक प्रतिभाशाली युवा निर्देशक सामने आए हैं परंतु राजकुमार हीरानी ने तीन निरंतर सुपर सफल फिल्में देकर स्वयं को चक्रवर्ती राजा सिद्ध किया है।

    उनकी फिल्मों ने सफलता के साथ सामाजिक सोद्देश्यता बरकरार रखी है। राजकुमार हीरानी लेखक-फिल्मकार हैं और उनका लेखक स्वरूप ही निर्देशकीय शक्ति का आधार है। इस दशक में फिल्म में पूंजी निवेश और फिल्म प्रदर्शन और वितरण क्षेत्रों में कॉपरेरेट और मल्टीप्लैक्स के कारण क्रांतिकारी परिवर्तन हुए हैं। फिल्म के प्रचार के लिए सितारे सबकुछ करने को तैयार हैं। दरअसल मनोरंजन उद्योग में टेलीविजन अत्यंत लोकप्रिय सिद्ध हो रहा है और भविष्य में इसकी पहुंच इतनी अधिक व्यापक होगी कि कुछ फिल्मों का निर्माण केवल टेलीविजन पर प्रदर्शन के लिए होगा। यह राष्ट्रीय चिंता की बात होनी चाहिए कि इस माध्यम का सारा संचालन लोकप्रियता आकलन के अत्यंत सीमित और दोषपूर्ण तरीकों पर टिका है। दूरदर्शन को मजबूत बनाकर ही इन प्राइवेट चैनलों के संचालकों को सही सबक सिखाया जा सकता है।

    आजकल हमेशा बेचैन रहने वाला युवा वर्ग प्राय: च्यूइंगम का प्रयोग करता है। टेलीविजन आंखों का च्यूइंगम है। टेलीविजन की खबरों ने कहर भी ढाया और जेसिका लाल जैसे हत्याकांड को भी पुन: जीवित किया है। इसी ‘च्यूइंगम’ ने जागते रहो की हुंकार भी लगाई है। नई सदी के पहले दशक ने आगामी तीव्र परिवर्तन का प्रोमो भी प्रस्तुत किया है।

  5. Ali

    Harshal,
    Your new ‘Avatar’ Pic is very cool dude.
    As far story of Random Access Version 1 (RA.1) is concerned, may be SRK took some inspiration from ‘Robot’.
    Abid bhai can give us some info on it.

  6. Bounty Hunter

    Ali bhai
    Thanks….
    Abt Ra.1, im really looking forward to this one..Specially VFX…

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